Kavi Amrit Wani
मुझे तो बस इतनीसी बात परी ही बेहद नाज है कि ये नुश्के , नज्म,शायरी ,मुक्तक और रूबाइयां ये तमाम अक्ष मेरे रूहानी अल्फाज हैं ।
अमृत लाल चंगेरिया (कुमावत)
वास्तु शास्त्री एंव नक्शा नवीस
शिक्षा: एम . ए. , एम. एड . 
व्यवसाय : प्रधानाचार्य (रा. उ. मा. वि. ऐराल , चित्तौड्गढ़ राज) 
रूचि : पठन , लेखन तथा भ्रमण 
रचनाएँ : राजस्थानी व हिन्दी में पध–लेखन, समाचार पत्रों, आकाशवाणी व कवि सम्मेलनों में कविताओ की प्रस्तुति
प्रकाशित पुस्तकें : आखर कुंडली, महालक्ष्मी चालीसा, सरस्वती चालीसा, साँवरा सेठ चालीसा, भादवा माता चालीसा, चमत्कार चालीसा, नवी हनुमान चालीसा, मीरा चालीसा, जनगणना पर कुंडलिया, शिल्प कला पर सो कुंडलिया,